सोमवार, 27 फ़रवरी 2012

बुरा लगा जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल ...

जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल यानि जयपुर साहित्य समारोह के रंग में रंगी गुलाबी नगरी के उत्साह की बानगी देखते ही बनती है। मगर यह एक प्रबुद्ध वर्ग विशेष तक ही सीमित है। राजस्थान की मिटटी में छिपे साहित्य को किसी ने सामने लाने का प्रयास तक नहीं किया। विजयदान देथा या लक्ष्मी कुमारी चूडावत जैसे महान साहित्यकारों तक को अनदेखा किया गया और विदेशो में हींग लगाने को भी ना पूछे जानेवाले लेखको को महिमा मंडित किया जा रहा है. अपनी विरासत भूल कर विदेशो की और ताकने से सदा हम हीन के हीन ही बने रहेंगे . कोई तो एक समारोह हमारे राजस्थान के हीरों के नाम हो , जिसके उनकी प्रतिभा  खुल कर निखर कर आम जन के सामने आये....
२३.१.१२





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