जीवन ईश्वर की अनमोल देन है, इसमें कोई संदेह नहीं . परन्तु क्या जीवन मैं आने वाले दुःख भी उतने ही अनमोल हैं जितने की सुख ?? मेरी बात कुछ अटपटी सी लग सकती है . पर ये बात सोचने वाली है की क्या बिना काँटों के गुलाब का महत्व भी उतना ही होता जितना काँटों वाले गुलाब का. काँटों वाला गुलाब सहज ही प्राप्त नहीं होता ,उसको हासिल करने के लिए सावधानी से प्रयास करने पड़ते है और कई बार तो हाथ से खून भी छलक आता है . परन्तु उस गुलाब को पा कर हम अपने दर्द को भूल जाते है.ठीक उसी तरह दुःख के दिनों के बाद हासिल सुख , मेहनत से हासिल किया गया फल, सच में विलक्षण और अद्भुत होता है. दुःख में हम कई बार भगवन को कोसते भी है और कई बार उनको मनाने के लिए मंदिर मस्जिद के फेरे भी लगते है . मगर सच तो ये है की हमारी ही कुछ भूलों की परिणिति दुर्दिनो के रूप में हमारे समक्ष होती है . बहुत कम बार ऐसा होता है की किसी घटना का पूरा दोष हम ईश्वर या तकदीर के मत्थे मढ़ सके.परन्तु ये अवश्य सच है कि जिस प्रकार हमारे समक्ष विपरीत परिस्थितियां आ खड़ी होती है , उसी प्रकार अनुकूल समय नहीं आता.. वो तो धीरे- धीरे ही आता है . इसका भी एक कारण है यदि अच्छा और बुरा समय यदि लगातार बदलता रहे तो... न ही हमें अच्छे समय की क़द्र होगी न ही बुरे समय में हम पूरे प्रयास करेंगे .....और अंतिम महत्वपूर्ण बात की... जीवन में सिर्फ अच्छा ही समय निकाला तो जीवन का आनंद कहाँ ??? दुःख हमें स्वत्व का अनुभव करते है और बेशक ईश्वर के अधिक करीब भी दुःख ही ले जाते हैं .. तो दुःख अच्छे हैं ना .......!!!
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